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472. Anandha Kannan (P33)

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Anandha Kannan

Anandha KannanLink(Hameer Kalyan)

आनंद नृत्य करो, कन्हैया…
मेरे मन के तारों में आकर नृत्य करो…
हे सौंदर्य के दिव्य विग्रह, उन्निक्कन्ना तुम,
सदैव मेरे आनंदमय जीवन का स्वरूप बन जाओ!

तुम्हारे काले घुँघराले केशों की शोभा काली चूड़ियों को भी मात देती है,
मूंगे को भी लजा देने वाली
तुम्हारे अधरों की आभा भी,
दूध की सुगंध से भरे तुम्हारे नन्हे होंठ भी,
पूर्णिमा के चाँद को भी मात देने वाला तुम्हारा मुखकमल,
लज्जा से खिल उठी तुम्हारी कमल-सी आँखें भी,
हे अंबाडी की करुणामयी मूर्ति!

मंजाड़ी के दानों को भी मात देने वाला लाल रेशमी वस्त्र धारण किए,
तुम नाचो, कन्हैया,
तुम्हारे हाथों की स्वर्ण कंगनियाँ
ताल के साथ मधुर झंकार करें!
कमर का स्वर्ण करधनी डोलती रहे,
स्वर्ण नूपुर उछल-उछल कर बजते रहें,
जब तुम्हारे नन्हे पावन चरण चंचल ताल पर थिरकें,
तब मेरा जन्म सफल हो जाए।

मक्खन-सा पिघलता मेरा हृदय मैं तुम्हें अर्पित कर दूँ,
दूध-सा उफनता अपना प्रेम भी मैं तुम्हें दे दूँ।
राग, ताल और श्रुति बनकर तुम आओ,
और लय बनकर मेरे भीतर आकर भर जाओ!
हे श्यामवर्ण, तुम ही मेरे भीतर पूर्णतः भरकर नृत्य करो…
और मैं तुम्हारे राग-सुधा-रस-सागर में लीन हो जाऊँ!